Another piece of HEART...
समझते हो खुद को…?
छोटी सी जिन्दगी में आसियां जो अपना बना लो तो
समझते हो खुद को
दो पल निकाल इस कसी जिन्दगी में से बतिया लो तो
समझते हो खुद को
तारों की झिलमिलाहट, चाँद का मुस्कुराना गर अच्छा लगता है तो
समझते हो खुद को
बारिश की बूँदों से खेलना जो आता है तुम्हे तो
समझते हो खुद को
होती है मह्सूस गर्माहट उस माँ के हाथों की, उसकी ममता, उसका आँचल तो
समझते हो खुद को
अनजानी राहों में आता है किसी को बनाना अपना तो
समझते हो खुद को
छोटी सी जिन्दगी में आसियां जो अपना बना लो तो
समझते हो खुद को…समझते हो खुद को…

No comments:
Post a Comment